Wednesday, January 13, 2010

कुम्भ राशी के लिए सन 2010

Dear Friends,
The below Said Predictions are according to MOON SIGN as per VEDIC Indian Astrology.
It has NO CONNECTION with Western Zodiac Sign, which is Calculated only by Date and Month.
पहली तिमाही- जनवरी से मार्च 2010साल के प्रथम माह में आपके जरूरी कार्य सम्पन्न होंगे. अनेक उपलब्धियां हासिल करने करने के अवसर मिलेंगे. नये सम्बन्धों से आने वाले समय में लाभ होगा. इस समय लम्बी दूरी की यात्रा से बचें. मुकदमेबाजी से दूर रहना हितकारी रहेगा. दाम्पत्य जीवन में तनाव रह सकता है. सम्बन्धों में दूरियां एवं मित्र वर्ग की नारजगी बढ़ सकती है. इन हालातों में उचित होगा कि वाणी पर नियंत्रण रखें.
तिमाही का अगला माह लाभ प्राप्ति के लिये शुभ अवसर लेकर आएगा. इस माह आप अपने कार्य को सफलता पूर्वक पूरा कर सकेंगे. कठिन कार्यों को भी अपनी कर्याक्षमता से सम्पादित कर पाएंगे. इस अवधि में कोई बड़ा सौदा कर सकते हैं. यश में वृद्धि होगी. आत्मविश्वास बना रहेगा. छात्रों को पढ़ाई में अच्छी सफलता मिलेगी. माह अंत में आप किसी का भरोसा प्राप्त कर सकेंगे. पराक्रम व पुरुषार्थ से सफलता हासिल करेंगे. परिवार में सुलह शान्ति रहेगी. गुरुओं से मिलने का अवसर प्राप्त होगा.
दूसरी तिमाही- अप्रैल से जून 2010 दूसरी तिमाही के प्रथम माह के अंत तक रूके हुए कार्यों में प्रगति होगी. धन लाभ व उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे. इस माह में पारिवारिक सुखों में भी वृद्धि होगी. धर्मिक कार्यों में रुचि व व्यय बढेंगे. किसी निकट संबन्धी से धोखा मिलने की संभावना रहेगी अत: सजग रहना उचित रहेगा. स्वास्थ्य में कमी महसूस कर सकते हैं. दाम्पत्य जीवन में कुछ परेशानियां आ सकती हैं. सुख साधनों पर अधिक खर्च होगा.
मई माह में आप कैरियर एवं कार्यक्षेत्र से संबन्धित उचित निर्णय ले पाएंगे. यइ इन विषयों के लिए अच्छा समय रहेगा, इसका लाभ उठाइये. इस समय में आपको किसी नई योजना पर काम करने का अवसर मिल सकता है. आर्थिक परेशानियों का भी सामाधान निकलेगा. मित्रों का सहयोग इन दिनों मिलता रहेगा. इनका सहयोग आपको लाभ व सफलता दिलाएगा. आपका मनोबल बढ़ेगा. माह अंत में कोई काम टाल सकते हैं.
तीसरी तिमाही - जुलाई से सितम्बर 2010जुलाई माह में व्यावसायिक क्षेत्रों में अच्छी सफलता मिलेगी. इस अवधि में जोश व उत्साह से अपने कार्य को पूर्ण कर पाएंगे. उच्चाधिकारियों से सहयोग मिलेगा. परन्तु, संतान संम्बन्धी चिन्ताओं के कारण आप परेशान हो सकते हैं. परिवार में शुभ व धार्मिक कार्यों पर खर्च होगा. भूमि मामलों में सफलता मिलेगी.
अगस्त के अन्त में परिवार में तनावपूर्ण वातावरण हो सकता है इससे संचय में कमी आ सकती है. महिलाओं पर व्यय अधिक होने की संभावना है. इन दिनों आपका क्रोध भी बढ़ेगा, जिस पर आपको निंयत्रण रखना होगा. परिवार के सदस्यों से वैचारिक मतभेदों में वृद्धि हो सकती है. आय में कमी व व्ययों में अधिकता रहने की संभावना है. मानसिक तनाव बना रह सकता है जो सितम्बर माह में और बढ़ सकता है. लेकिन इस माह में आर्थिक लाभ के अवसर प्राप्त होंगे.
इस माह में व्यवसाय करने वालों को व्यावसायिक लाभ व नौकरी करने वालों को पदोन्नति मिलने की संभावना है. सोचे हुए काम पूरे होंगे. आपकी व्यस्तताएं बढे़गी. माह के अन्त में आराम करने का समय मिलेगा. विवाह संबन्धी निर्णयों के लिये यह समय उचित नहीं है.
चौथी तिमाही- अक्तूबर से दिसम्बर 2010चौथी तिमाही के प्रथम माह में आपके बनते कामों में बाधाएं आ सकती हैं. यात्राओं से लाभ मिलना कठिन होगा. परिवारिक व व्यावसायिक कामों में चिन्ताएं बढ़ेंगी. विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता प्राप्त करेंगे. आय के साधनों में वृद्धि होगी. स्वास्थ्य के संदर्भ में यह माह आपकी माता और आपके लिए कुछ कष्टकारी रह सकता है.
नवम्बर माह में सभाओं में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा. इस समय में मिडीया से सम्बन्धित क्षेत्रों में भी लाभ होने की संभावना है. इस समय अपनी बुद्धि से धन अर्जित कर पाएंगे. कार्यक्षमता का पूर्ण लाभ उठा पाएंगे. बेरोज़गारों को नौकरी मिल सकती है़, पहले से नौकरी में होने पर पदोन्नति व वेतन में वृद्धि की संभावना है.
दिसम्बर में भाग्य प्रबल रहेगा। सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी. धर्मिक कार्यों की ओर रुझान बढे़गा. शिक्षा में रूकावट आ सकती है. मंगल के प्रभाव से परिश्रम द्वारा व्यावसायिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे. आय के साधनों के वृद्धि की संभावना रहेगी. कार्यस्थल पर कार्यकुशलता दिखाने का पूरा मौका मिलेगा. स्वास्थ्य की ओर ध्यान दें.

गौरव त्रिपाठी

Sunday, May 3, 2009

सलमान ने मुझे घर नहीं दिया : असिन

’गजनी’ के जरिये चर्चित हुईं असिन के बारे में नकारात्मक खबरें ज्यादा सुनने को मिलती हैं। उनके पिता सेट पर मौजूद रहते हैं और दखलअंदाजी करते हैं। सेट पर असिन नखरे दिखाती हैं। एक बार शूटिंग के दौरान उन्होंने जूते पसंद नहीं आने पर दो लाख रुपए के जूते खरीदकर निर्माता को चूना लगाया। सलमान खान से उनकी नजदीकियों की खबरें भी लगातार आती रही हैं। दोनों ‘लंदन ड्रीम्स’ फिल्म साथ कर रहे हैं। पिछले दिनों कहा गया कि असिन को सलमान खान ने एक घर बतौर तोहफे के दिया है। असिन ने बहुत दिनों बाद इस खबर का खंडन करते हुए कहा ‍है कि ये खबर गलत है। उन्हें सलमान ने कोई भी घर तोहफे के रूप में नहीं दिया है।


गौरव त्रिपाठी

फिरोज खान : बॉलीवुड के ईस्टवुड

25 सितंबर 1939 को जन्मे फिरोज खान लंबे समय से बीमार थे और शायद अपने घोड़ों से मिलने की जिद ने उन्हें ये बल दिया कि वे बीमारी से लड़ते रहे। बेंगलुरु में फिरोज का विशाल फॉर्म हाउस है, जिसमें कई जानवर हैं। डॉक्टर्स ने शुक्रवार उन्हें बेंगलुरु ले जाने की इजाजत दी और 27 अप्रैल को अपने फॉर्म हाउस में उन्होंने अंतिम साँस ली। पूरी तरह से भारतीय होने के बावजूद अभिनेता-निर्देशक फिरोज खान की जीवनशैली और परदे पर उनका कैरेक्टर हॉलीवुड के काउबॉय स्टाइल का रहा है। फिरोज खान हॉलीवुड अभिनेता क्लींट ईस्टवुड से इतने अधिक प्रभावित थे कि अपने को बॉलीवुड का ईस्टवुड समझते थे। सत्तर के दशक में उन्होंन काउबॉय स्टाइल की अनेक फिल्मों में काम किया। ऐसी फिल्मों में काला सोना, अपराध, खोटे सिक्के के नाम गिनाए जा सकते हैं।रफ टफ चेहरा, ऊँचा कद, सिर पर बड़ा-सा टोप, हाथ में सिगार, कंधे पर बंदूक, हाथ में पिस्तौल, कमर में बँधा बुलेट बेल्ट, लांग लेदर शू और जम्प कर घोड़े पर बैठने की उनकी अदा ने दर्शकों को काफी लुभाया था। जब फिरोज हिंदी सिनेमा के लाइम लाइट में आए, तब चिकने-चाकलेटी चेहरों वाले नायकों का दौर था। इसलिए शहरी और ग्रामीण दर्शकों को उनकी ये अदाएँ दिलचस्प लगीं। लंबी कारों में सवारी करना और जेम्स बांड स्टाइल में आगे-पीछे घूमने वाली सुंदर लड़कियों से घिरे रहना उनका शगल था। अपनी नई एक्टिंग स्टाइल के जरिये फिरोज खान उस समय के अनेक हीरो के आँख की किरकिरी बन गए थे। मसलन रामानंद सागर की फिल्म आरजू के असली हीरो राजेन्द्र कुमार थे, लेकिन छोटे रोल में फिरोज ने सबका ध्यान आकर्षित किया थी। असित सेन की फिल्म सफर में राजेश खन्ना जैसे सितारे की मौजूदगी के बावजूद फिरोज खान ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। पचास के दशक की फिल्में दीदी और जमाना से उन्होंने अपना करियर शुरू किया था। रिपोर्टर राजू (1962) में पहली बार एक पत्रकार के रोल में उन्हें हीरो का चांस मिला था। वैसे उन्होंने एक्टिंग की कोई ट्रेनिंग नहीं ली थी फिर भी कैमरा फेस करना और दर्शकों को लुभाने की कला में वे माहिर रहे। उन्हें लेडी किलर खान भी कहा जाता था। खासकर कुर्बानी फिल्म में उनका और जीनत अमान का बिंदासपन दर्शकों को बेहद आकर्षित कर गया था। अपने खाने-पीने, मौज-मस्ती करने की आदतों के चलते उन्होंने कई अच्छी फिल्मों के ऑफर ठुकरा दिए। जैसे राजकपूर की फिल्म ‘संगम’ में राजेन्द्र कुमार और ‘आदमी’ फिल्म में मनोज कुमार का रोल उनके हाथ से फिसल गया जिसका अफसोस उन्हें लंबे समय तक बना रहा। बम्बइया फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव के शिकार हुए फिरोज खान ने 1972 से अपना प्रोडक्शन हाउस आरंभ किया और पहली फिल्म ‘अपराध’ को हॉलीवुड शैली में पेश किया। हाई-वोल्टेज ड्रामा और एक्शन से भरपूर फिल्में धर्मात्मा, कुर्बानी और जाँबाज को दर्शकों ने खूब सराहा। कुर्बानी में नाजिया हसन से उन्होंने गवाया ‘आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए, तो बात बन जाए’। यह गाना नशीली धुन और फिल्मांकन के कारण खूब लोकप्रिय हुआ था।
IFM‘जाँबाज’ फिल्म को खास सफलता नहीं मिली। फिरोज का मानना था कि यह समय से आगे की फिल्म है। इस स्टाइलिस्ट फिल्म को टीवी पर खूब देखा गया। इसके बाद दयावान, यलगार, जांनशी और प्रेम अगन फिल्में टिकट खिड़की पर मार खा गईं। फिरोज खान इसके बाद गुमनामी के अँधेरे में चले गए। अपने तीन और भाइयों संजय, अकबर, समीर में सबसे चमकीले फिरोज खान ही रहे। उनका योगदान पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के बीच पुल जैसा था। अपने बेटे फरदीन के करियर को चमकाने की उन्होंने कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। कुछ फिल्मों में फिरोज ने चरित्र रोल भी निभाए, लेकिन 'शेर भले ही बूढ़ा हो जाए, वह घास नहीं खाता' अंदाज में फिरोज ने अपनी आन-बान-शान हमेशा कायम रखी।


गौरव त्रिपाठी

नर्गिस : महानतम अभिनेत्रियों में से एक

हिंदी सिनेमा की महानतम अभिनेत्रियों में से एक नर्गिस ने करीब दो दशक के फिल्मी सफर में दर्जनों यादगार भूमिकाएँ की और 1957 में प्रदर्शित फिल्म मदर इंडिया में राधा की भूमिका के जरिये भारतीय नारी का एक नया और सशक्त रूप सामने रखा। नर्गिस ने मदर इंडिया के अलावा आवारा, श्री 420, बरसात, अंदाज, लाजवंती, जोगन परदेशी, रात और दिन सहित दर्जनों कामयाब फिल्मों में बेहतरीन अभिनय किया। राजकपूर के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से सराही गई और दोनों की जोड़ी को हिंदी फिल्मों की सर्वकालीन सफल जोड़ियों में से गिना जाता है। सिनेप्रेमियों ने इस जोड़ी की फिल्मों को खूब पसंद किया। इस जोड़ी की हिट फिल्मों में आग, बरसात, आह, आवारा, श्री 420, चोरी-चोरी, जागते रहो शामिल हैं।एक जून 1929 को पैदा हुई नर्गिस का असली नाम फातिम रशीद था और वे मशहूर गायिका जद्दनबाई की पुत्री थीं। कला उन्हें विरासत में मिली थी और सिर्फ छह साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘तलाशे हक’ से अभिनय की शुरुआत कर दी। 1940 और 50 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और 1957 में प्रदर्शित महबूब खान की फिल्म मदर इंडिया उनकी सर्वाधिक चर्चित फिल्मों में रही। इस फिल्म को ऑस्कर के लिए नामित किया गया था। मदर इंडिया में राधा की भूमिका के लिए नर्गिस को फिल्म फेयर सहित कई पुरस्कार मिले। इसी फिल्म में शूटिंग के दौरान अभिनेता सुनील दत्त ने आग से उनकी जान बचाई थी और बाद में दोनों परिणय सूत्र में बँध गए। शादी के बाद नर्गिस ने अभिनय से नाता तोड़ लिया और लाजवंती, अदालत, यादें, रात और दिन जैसी कुछेक फिल्मों में ही अभिनय किया। रोमांटिक भूमिकाओं को सहज रूप से निभाने वाली नर्गिस ने लीक से हटकर कई भूमिकाएँ की। लाजवंती में उन्होंने बलराज साहनी की पत्नी की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म पति-पत्नी के बीच अविश्वास तथा उससे उनके बच्चे पर पड़ने वाले असर पर आधारित थी। इस फिल्म में नर्गिस ने बेहतरीन भूमिका की और दर्शकों को भावनात्मक रूप से उद्वेलित किया। अभिनय से अलग होने के बाद नर्गिस सामाजिक कार्य में जुट गईं। उन्होंने पति सुनील दत्त के साथ अजंता आर्ट्स कल्चरल ट्रूप की स्थापना की। यह दल सीमाओं पर जाकर जवानों के मनोरंजन के लिए स्टेज शो करता था। इसके अलावा वे स्पास्टिक सोसाइटी से भी जुड़ी रहीं। नर्गिस को पद्मश्री सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। इनमें फिल्मफेयर पुरस्कार के अलावा फिल्म रात और दिन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनय का राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल है। बाद में उन्हें राज्यसभा के लिए भी नामित किया गया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। इसी कार्यकाल के दौरान वे गंभीर रूप से बीमार हो गईं और तीन मई 1981 को कैंसर के कारण उनकी मौत हो गई। उनकी याद में 1982 में नर्गिस दत्त मेमोरियल कैंसर फाउंडेशन की स्थापना की गई। इस प्रकार निधन के बाद भी नर्गिस लोगों के दिल में बसी हुई हैं।


गौरव त्रिपाठी

आखिर अँगूठी कहाँ गई

आज सुबह से ही घर में माँ की कर्कश आवाज सुनाई पड़ रही थी। छुनकी को अंदाज लग गया था कि जरूर कोई नुकसान हुआ होगा। जब भी छोटा या बड़ा नुकसान होता था माँ की खीझ इसी तरह ब़ढ़ जाती थी। छुनकी ऐसे मौके पर माँ ही हर बात सुन लेती थी। अगर उसे कुछ कहना होता तो माँ का गुस्सा ठंडा होने का इंतजार करती थी। पर आज माँ को गुस्सा किस बात पर आ रहा था? छुनकी ने कुछ पूछने के बजाय सुनकर अंदाज लगाना ठीक समझा। ऐसा करने से माँ के गुस्से की चपेट में आने की आशंका न्यून हो जाती थी। उसने सुना कि माँ अपनी अँगूठी के बारे में बड़बड़ाती जा रही है। आगे उसने सुना कि माँ ने कल अँगूठी उतारकर टीवी वाले कमरे में रखी थी फिर पता नहीं कहाँ चली गई। मिल ही नहीं रही है। छुनकी ने कहा कि अब जब तक अँगूठी मिल नहीं जाती तब तक माँ उसी के बारे में बात करती रहेगी। तो छुनकी ने चुपचाप नाश्ता किया और अपनी सहेली के यहाँ चली गई। उसे मालूम था कि ऐसे समय यही सबसे अच्छा तरीका होता है। माँ को जब खोई अँगूठी वापस मिल जाएगी तो उनका मूड अच्छा हो जाएगा। छुनकी जब दोपहर में लौटी तो माँ को वैसे ही पाया। तो इसका मतलब था कि माँ की खोज पूरी नहीं हुई है। छुनकी ने माँ से पूछा पर माँ तुमने अँगूठी रखी कहाँ थी? माँ ने कहा यही तो रखी थी टीवी वाले कमरे में और अब देखती हूँ तो मिल ही नहीं रही है। छुनकी ने भी माँ के साथ पूरा कमरा तलाशा पर कोई नतीजा नहीं। माँ ने बताया कि यह अँगूठी उनकी शादी की दूसरी सालगिरह पर छुनकी के पापा ने उन्हें दी थी और उन्हें यह बहुत प्रिय है। शाम तक अँगूठी नहीं मिली। माँ के सर में बहुत दर्द होने लगा। पापा ऑफिस से लौटे तो उन्होंने ने भी पूरी बात सुनी। उनका कहना था कि पहले अच्छी तरह देखो, यहीं-कहीं रखने में आ गई होगी। छुनकी ने बताया कि पूरे घर में तो ढूँढ चुके हैं पर मिल ही नहीं रही है। पापा ने कहा देखते हैं, और कहकर वे अपने काम में लग गए। मार्च और अप्रैल के महीने में उन पर काम का ज्यादा ही दबाव रहता है। तो काम करते कि अँगूठी ढूँढने लगते?शाम को पड़ोस से लवलीन आंटी मिलने आई। लवलीन आंटी को छुनकी ने अँगूठी पुराण सुनाया। लवलीन आंटी को देखकर माँ के सर का दर्द कुछ कम हुआ और वे तुरंत बातचीत के लिए आ गई। लवलीन आंटी ने माँ को कहा- तुम काम वालों का बराबर ध्यान रखती हो या नहीं? माँ ने कहा पर हमारे यहाँ आने वाली बाई तो बहुत अच्छी है। पहले भी इसी तरह कई चीजें इधर-उधर रखने में आ गई थी उसी ने ढूँढकर दी। वह कभी ऐसा नहीं कर सकती। लवलीन आंटी ने कहा- अरे, आँख मींचकर इतना विश्वास भी मत करो। जब कोई चीज नहीं मिल रही है तो गायब होने से तो रही। हो न हो किसी ने चुराई होगी। अभी पिछले दिनों मिसेज वर्मा के यहाँ दो हजार रु. गायब हो गए। और फिर उनके माली को पकड़ा तो उसने कबूला कि रुपए उसने ही चुराए थे। छुनकी बातें बड़े ध्यान से सुन रही थी। उसे लगा कि अभी कह दे कि राधा बुआ ऐसा काम कभी नहीं करेगी पर उसने चुप रहना ज्यादा ठीक समझा। लवलीन आंटी माँ के दिमाग में नई बात डालकर चली गई। माँ अँगूठी नहीं मिलने से पूरे दिन परेशान रही। पर दिन तो बीत गया। अब रात को भी अँगूठी माँ को परेशान किए जा रही थी।
अब माँ को अँगूठी न मिलने और नल कम आने दोनों बातें परेशान कर रही थीं। छुनकी को याद आया कि कल टीवी पर प्रवचन देते हुए बाबाजी कह रहे थे कि जब गुस्सा ज्यादा आता है तो वह हमारे विवेक को नष्ट कर देता है।
अगले दिन नल कम आए और माँ को गुस्सा करने का एक मौका मिल गया। दरअसल नल कम आने पर कम पानी से साथ काम चल जाता है पर जब तक नल कम आने की बात सदन में गूँजे नहीं, तो घर में पता कैसे चलेगा कि आज नल कम आए हैं। पिताजी तो दूसरे दिन ज्यादा काम का कहकर जल्दी दफ्तर चले गए। अब माँ को अँगूठी न मिलने और नल कम आने दोनों बातें परेशान कर रही थीं। छुनकी को याद आया कि कल टीवी पर प्रवचन देते हुए बाबाजी कह रहे थे कि जब गुस्सा ज्यादा आता है तो वह हमारे विवेक को नष्ट कर देता है।छुनकी माँ को बाबा का यह उपदेश देती इसके पहले ही लवलीन आंटी आ पहुँची। लवलीन आंटी ने आकर बताया कि पास ही में राधेश्याम बाबा रहते हैं। वे तंत्र-मंत्र जानते हैं और खोई चीजों का पता बता देते हैं। माँ खोई अँगूठी के पते ‍के लिए उनके पास जाने को तैयार हो गई।
शाम का कार्यक्रम तय हो गया कि वे राधेश्याम बाबा के पास जाएँगे। छुनकी को यह बात रोमांचक लगी कि क्या वाकई बाबा खोई चीजों का पता बता देते हैं। अगर ऐसा हुआ तो दो साल पहले जो उसका फाउंटेन पेन गुम हुआ वह उसका पता भी पूछ लेगी।
ND
NDशाम को लवलीन आंटी के साथ छुनकी और मम्मी राधेश्याम बाबा के यहाँ गए। राधेश्याम बाबा के यहाँ अच्छी-खासी भीड़ लगी थी। छुनकी ने देखा कि क्या इतने लोगों की खोई चीजों का पता राधेश्याम बाबा को होगा। और पता होगा भी कैसे? तीनों जमीन पर बिछाई एक दरी पर बैठ गए। राधेश्याम बाबा को माँ ने सारी बात बताई। इसके बाद बाबा ने आँखें मींचकर कहा कि अँगूठी उत्तर दिशा में है। 'क' अक्षर से जिस व्यक्ति का नाम शुरू होता है उसके पा। छुनकी का मन हुआ कि वह भी कुछ पूछ ले कि उसका फाउण्टेन पेन क्या बबलू ने ही लिया है। उसे बबलू पर ही शक था। पर उसने सोचा यह बात फिर किसी दिन पूछेंगे। तीनों घर आ गए। घर आते हुए छुनकी के मन में एकता कपूर के सीरियल वाला 'क' घूम रहा था कि आखिर 'क' नाम का चोर कौन हो सकता है। उसे खुशी भी थी कि बाबा ने 'र' नहीं बताया वरना राधा बुआ पर आरोप लग सकता था। बाबा की बात पर विचार होने लगा। माँ ने कहा - उन्हें तो पहले ही शक था कि यह दूधवाले कमलेश का ही काम हो सकता है। कल जब वह दूध देने आया था। माँ ने कहा - अब तो मुझे पक्का यकीन हो गया है। छुनकी सोच रही थी कि माँ को शक था तो फिर दो दिनों तक घर में अँगूठी क्यों ढूँढते रहे। पहले यह बात क्यों नहीं बताई। लवलीन आंटी ने कहा कि उन्हें कुछ काम है और अब वे घर जाएँगे। पर जाते-जाते वे यह कहना नहीं भूली कि राधेश्याम बाबा की कोई बात गलत नहीं होती। लोगों का उन पर बड़ा विश्वास है। थोड़ी देर बाद पापा दफ्तर से आए। उन्हें भी यह बात बताई गई। उन्होंने कहा ‍कि किसी पर इस तरह का आरोप लगाने से पहले खुद थोड़ा तलाश कर लो तो ज्यादा अच्छा रहेगा। और अगर कमलेश के पास अँगूठी नहीं निकली तो? माँ ने कहा ‍कि उसका घर उत्तर दिशा में ही है और उसका नाम भी 'क' से शुरू होता है तो पक्का है कि वही चोर है। पिताजी ने कहा ठीक है पर यह साबित कैसे करेंगे कि अँगूठी उसी ने ली है। माँ ने कहा कि अगर पुलिस में शिकायत करें तो वह चोर से सच उगलवा लेती है।
और हाँ फ्रीज उत्तर दिशा में नहीं ‍बल्कि पूर्व दिशा में रखा था। छुनकी ने कहा - जय हो, राधेश्याम बाबा की। उनकी वजह से ही यह अँगूठी वापस मिल सकी है।
पिताजी ने माँ से कहा कि बिना बात के बेचारे दूधवाले को परेशान करना ठीक नहीं होगा और फिर 'क' अक्षर से तो माँ की सहेली किरण का भी नाम आता है और वह भी तो उत्तर दिशा में ही रहती है। अब माँ थोड़ा सा शांत हुई। वरना वे तो दूधवाले भैया को चोर मान ही बैठी थी। फिर भी माँ को शक तो था ही।छुनकी इस पूरे दिन की दौड़-भाग में बहुत थक गई थी। तो उसने माँ से पूछा - माँ क्या मैं फ्रीज में रखी आइसक्रीम ले लूँ? ठीक है - माँ ने जवाब दिया। छुनकी ने आइसक्रीम लेने के लिए फ्रीज खोला और आइसक्रीम निकालते हुए उसके हाथ से बाजू में रखी एक कटोरी गिर गई। कटोरी गिरते ही उसमें रखे धनिया पत्ती के साथ अँगूठी भी जमीन पर गिर पड़ी। छुनकी ने जयघोष किया - माँ अँगूठी! माँ तुरंत किचन में दौड़कर आई। पीछे-पीछे पिताजी भी। दोनों ने आकर देखा ‍कि जमीन पर अँगूठी पड़ी है। माँ ने तुरंत अँगूठी उठा ली। पिताजी ने कहा - लगता है कि दूधवाला पकड़े जाने के डर से अँगूठी आकर फ्रीज में रख गया। माँ बस हँस दी। और हाँ फ्रीज उत्तर दिशा में नहीं ‍बल्कि पूर्व दिशा में रखा था। छुनकी ने कहा - जय हो, राधेश्याम बाबा की। उनकी वजह से ही यह अँगूठी वापस मिल सकी है। माँ ने कहा कि चलो अब सोते हैं कल सुबह नल के लिए जल्दी उठना है। छुनकी तो अँगूठी मिलने की खुशी में आइसक्रीम खाकर ही सोई।


गौरव त्रिपाठी

मैडम तुसाद में स्थापित हो गए 'सचिन'

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के मोम के पुतले का उनके 36वें जन्मदिन पर 24 अप्रैल को यहाँ विश्व प्रसिद्ध मैडम तुसाद संग्रहालय में औपचारिक अनावरण किया गया।मोम के बने उनके पुतले को गत दिनों मुंबई में पहली बार प्रदर्शित किया गया था। यह पहला मौका था जब मैडम तुसाद संग्रहालय ने अपने किसी पुतले को संग्रहालय से कहीं बाहर प्रदर्शित किया था। इस पुतले को मुंबई से 14 हजार किलोमीटर की लंबी यात्रा के बाद यहाँ लाया गया है।हालाँकि खुद सचिन आईपीएल टूर्नामेंट में व्यस्त होने की वजह से इस ऐतिहासिक मौके पर उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन एक हाथ में बल्ला और दूसरे हाथ में हेल्मेट थामे हुए इस पुतले के अनावरण के मौके पर सैकड़ों क्रिकेटप्रेमी संग्रहालय में मौजूद थे।सचिन इस प्रसिद्ध संग्रहालय में जगह पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। हालाँकि उनसे पहले हिंदी फिल्मों के शहंशाह अमिताभ बच्चन, खूबसूरती की मिसाल कही जाने वाली ऐश्वर्या राय, सुपर स्टार शाहरुख खानGlamorous Pictures of King Khan और सलमान खानCollection of Sallu Pictures इस संग्रहालय की शोभा बढ़ा चुके हैं। अगर क्रिकेटरों की बात की जाए तो करिश्माई लेग स्पिनर शेन वॉर्न और महान बल्लेबाज ब्रायन लारा उनका साथ देने के लिए पहले से ही यहाँ मौजूद हैं।इस अवसर पर संग्रहालय की जनसंपर्क अधिकारी लिज एडवर्ड्स ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि सचिन का पुतला आगंतुकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। सचिन के 36वें जन्मदिन पर इस पुतले का अनावरण करते हुए हमें काफी खुशी हो रही है।



गौरव त्रिपाठी

मैडम तुसाद में स्थापित हो गए 'सचिन'

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के मोम के पुतले का उनके 36वें जन्मदिन पर 24 अप्रैल को यहाँ विश्व प्रसिद्ध मैडम तुसाद संग्रहालय में औपचारिक अनावरण किया गया।मोम के बने उनके पुतले को गत दिनों मुंबई में पहली बार प्रदर्शित किया गया था। यह पहला मौका था जब मैडम तुसाद संग्रहालय ने अपने किसी पुतले को संग्रहालय से कहीं बाहर प्रदर्शित किया था। इस पुतले को मुंबई से 14 हजार किलोमीटर की लंबी यात्रा के बाद यहाँ लाया गया है।हालाँकि खुद सचिन आईपीएल टूर्नामेंट में व्यस्त होने की वजह से इस ऐतिहासिक मौके पर उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन एक हाथ में बल्ला और दूसरे हाथ में हेल्मेट थामे हुए इस पुतले के अनावरण के मौके पर सैकड़ों क्रिकेटप्रेमी संग्रहालय में मौजूद थे।सचिन इस प्रसिद्ध संग्रहालय में जगह पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। हालाँकि उनसे पहले हिंदी फिल्मों के शहंशाह अमिताभ बच्चन, खूबसूरती की मिसाल कही जाने वाली ऐश्वर्या राय, सुपर स्टार शाहरुख खानGlamorous Pictures of King Khan और सलमान खानCollection of Sallu Pictures इस संग्रहालय की शोभा बढ़ा चुके हैं। अगर क्रिकेटरों की बात की जाए तो करिश्माई लेग स्पिनर शेन वॉर्न और महान बल्लेबाज ब्रायन लारा उनका साथ देने के लिए पहले से ही यहाँ मौजूद हैं।इस अवसर पर संग्रहालय की जनसंपर्क अधिकारी लिज एडवर्ड्स ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि सचिन का पुतला आगंतुकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। सचिन के 36वें जन्मदिन पर इस पुतले का अनावरण करते हुए हमें काफी खुशी हो रही है।



गौरव त्रिपाठी